Skip to main content

फूलों संग शूलें

कौन है दुनिया में ऐसा जो बस झूलों में झूले ।
सहना पड़ता है सबको ही फूलों के संग शूले ।।

फूल का रूप खिलाने को ज्यों धूप ज़रूरी है ।
जीवन में भी बिन संघर्ष हर बात अधूरी है ।
मुस्कान फूल की याद है पर संघर्षों को क्यों भूले ।।
सहना पड़ता है सबको ही फूलों के संग शूले ।।

है आसान ऋतु वसंत में फूलों का खिल जाना ।
पर मैंने तो भीषण गर्मी के गुलमोहर को माना ।
शिरीष को है सलाम जो हर मौसम को कबूले ।
सहना पड़ता है सबको ही फूलों के संग शूले ।।

देख कमल को गौर से कीचड़ में मुस्काता है ।
विपरीत परिस्थितियों में खिलके ईश को भाता है ।
कर उन्नत व्यक्तित्व फूल सा चल गगन को छूले ।
सहना पड़ता है सबको ही फूलों के संग शूले ।।

कौन है दुनिया में ऐसा जो बस झूलों में झूले ।
सहना पड़ता है सबको ही फूलों के संग शूले ।।

     -अंजुमन 'आरज़ू'©✍

Comments

Popular posts from this blog

सरस्वती वंदना

हों गीत मेरे, संगीत भरे । लय ना लय हो, सरगम मुखरे । माँ शारदा विनती करूँ तुझ से । हों ये गीत अनूप, अटल-ध्रुव से । मेरे गीतों को आशीष दे माँ । ये मोहन हों, मुरली को धरे ॥1॥ लय ना लय हो स...

'इंद्रधनुष' (दोहा गीत)

इंद्रधनुष छाये गगन,खिले धरा का रूप । कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्रारुप ॥ इंद्रधनुष सा नेह तो, सतरंगी संसार । रंग मिलें मिलकर सजें, पायें रूप अनूप ॥ कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्र...

हम्द-02 रब के बंदों से की महब्बत है

रब    के   बंदों  से   की  महब्बत  है अपनी  तो    बस   यही   इबादत  है सारी   तारीफ़   है   ख़ुदा   के   लिए जिसकी  दोनों  जहाँ  में  अज़मत है फूल     पत्तों    में    बेल    बूटों   में देखिए   रब   की   ही    इबारत   है शुक्र है  रब का  जो दिया  सो दिया अपनी क़िस्मत से कब शिकायत है ये   नमाज़ें    ज़कात    हज    रोज़े रब  को   पाने  की  ही   रवायत  है ग़म  में  भी   ढूंढ  ली   ख़ुशी   मैंने ये   हुनर   उसकी  ही   इनायत  है लाख    बेचैनियाँ    सही    लेकिन उसके   एहसास  से  ही   राहत है जिसके...