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हल्दी

लघुकथा

       एक बहन एक भाई वाले एक आदर्श परिवार में बड़े अरमानों से भाई का विवाह हुआ । गोरी सुंदर दुल्हन घर आई,  नये रिश्ते बने, माता-पिता को बहू, बहन को भाभी मिली । और भी नए रिश्तों की सौगातों के सपने सजे, आशाएं बंधीं ।
      कुछ ही दिन बीते थे कि घर में अपने पति की अहम भूमिका को देखकर, वह अपनी ननद अल्पना से बोलीं- तुम्हारे भइया बड़ी अहमियत रखते हैं इस घर में..।" अल्पना ने कहा -हां भाभी, वे धुरी है इस घर की ।" भाभी रसोई में खड़ी थी तो अल्पना ने आगे कहा -"बस यूं समझ लीजिए, कि वह नमक है, जैसे नमक बिना रसोई सूनी, वैसे ही उनके बिना यह धर सूना ।"
       भाभी बोलीं - "भैया नमक तो मैं क्या...??" अल्पना ने मुस्कुराकर कहां- "भैया रसोई के राजा तो भाभी रसोई की रानी ही होगी न .....।" तभी भाभी बोली- "मतलब काली मिर्च, और आप.... #हल्दी "
     अल्पना खुश हो गई । भारतीय संस्कृति में हल्दी सौभाग्य सूचक जो मानी जाती है, भोजन हो या त्वचा रंगत बढ़ाती है, आदि आदि...।
      अल्पना अपने मनभावन खयालों से निकल भी न पाई थी, कि भाभी आगे बोलीं -"भोजन में डाला तो डाला, नहीं तो नहीं भी डाला, स्वाद में कोई फर्क नहीं पड़ता, उल्टे मान घट जाता है, डालो तो खिचड़ी  न डालो तो पुलाव । भाभी के ये शब्द सुनकर अल्पना का मुस्कुराता गुलाबी चेहरा, सचमुच हल्दिया हो गया....।

     -अंजुमन आरज़ू©✍

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