धन्य हुई है हिंदी भाषा, तुम सा गीत रचयिता पाकर ।
श्रद्धा सुमन करते हैं अर्पित, तुमको गीत तुम्हारे गाकर ॥
गीत तुम्हारे गूंज रहे हैं, हिंदी प्रेमी रसिकों के मन ।
यश से तुम जीवित हो अब भी, गये नहीं हो तुम तो जाकर ॥
श्रद्धा सुमन करते हैं अर्पित, तुमको गीत तुम्हारे गाकर ॥
तुम कवियों के राजा नीरज; बंधा दिया गीतों से धीरज ।
शब्द शब्द में भाव गहन है, भरते हो गागर में सागर ॥
श्रद्धा सुमन करते हैं अर्पित, तुमको गीत तुम्हारे गाकर ॥
-अंजुमन 'आरज़ू'©✍
20/07/2018
Comments
Post a Comment