Skip to main content

प्यास की गहराइयां

भूल  कर  सच्चाइयाँ  परछाइयों  में  खो  गया
ये  ज़माना  आज  कल  चतुराइयों में खो गया

आम  की जो बन्द बोतल देखी कल बाज़ार में
मेरा मन बचपन की उन अमराइयों में खो गया

पोंछकर अश्कों के  मोती कर ही दी बेटी विदा
इक पिता का दर्दो - ग़म शहनाइयों में खो गया

पी  चुका  कितनी नदी पर तिश्नगी बुझती नहीं
ये  समंदर  प्यास  की  गहराइयों  में  खो  गया

नफ़रतों की इस तपिश से अब घुटन होने लगी   
प्यार  का  एहसास  भी  पुरवाइयों में खो गया

लाज़मी  है  चलते   रहना  मंजिलों   के  वास्ते
थक  के  जो बैठा यहाँ गुमनामियों में खो गया

आख़िरत   के  वास्ते  सारी  इबादत  भूल कर        
तू भी तो दुनिया की इन रअनाइयों में खो गया 

- अंजुमन 'आरज़ू'©✍

Comments

Popular posts from this blog

'इंद्रधनुष' (दोहा गीत)

इंद्रधनुष छाये गगन,खिले धरा का रूप । कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्रारुप ॥ इंद्रधनुष सा नेह तो, सतरंगी संसार । रंग मिलें मिलकर सजें, पायें रूप अनूप ॥ कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्र...

हम्द-02 रब के बंदों से की महब्बत है

रब    के   बंदों  से   की  महब्बत  है अपनी  तो    बस   यही   इबादत  है सारी   तारीफ़   है   ख़ुदा   के   लिए जिसकी  दोनों  जहाँ  में  अज़मत है फूल     पत्तों    में    बेल    बूटों   में देखिए   रब   की   ही    इबारत   है शुक्र है  रब का  जो दिया  सो दिया अपनी क़िस्मत से कब शिकायत है ये   नमाज़ें    ज़कात    हज    रोज़े रब  को   पाने  की  ही   रवायत  है ग़म  में  भी   ढूंढ  ली   ख़ुशी   मैंने ये   हुनर   उसकी  ही   इनायत  है लाख    बेचैनियाँ    सही    लेकिन उसके   एहसास  से  ही   राहत है जिसके...

ग़ज़ल-13 ग़ौर से देखा तो ये सारा जहाँ तन्हा मिला

ग़ौर  से   देखा  तो   ये    सारा   जहाँ   तन्हा   मिला चाँद    तन्हा   रात   तन्हा   आसमाँ    तन्हा    मिला वो जो  महफ़िल  में  लगाता  फिर  रहा  था कहकहे राज़-ए-ग़म उसके भी  दिल में  हाँ निहाँ तन्हा मिला अपनी  तामीर -ए- ख़ुदी  में  हर  बशर मसरूफ़ है साथ  कितने  फ़र्द   हैं   पर  आशियाँ  तन्हा  मिला चश्मदीदाँ  थे   बहुत   उस    हादसे   के   भीड़  में  ख़ौफ़  के  मारे  मगर  बस  इक  बयाँ   तन्हा मिला साथ  पर्वत  कब   चले  हैं  राह  में  ये   सोच कर बह्र  की  चाहत में  इक  दरिया  रवाँ  तन्हा  मिला दूर    तन्हाई     करे    ऐसा    ...