हाइकु
शुद्ध हवा में
चौपाल थी सजती
पीपल छाँव
खेत में नानी
कुएँ का ताजा पानी
शीतल ठाँव
गर्मी बिताते
नदियों में नहाते
चलाते नाँव
प्रकृति भाती
थी संदेशा लाती
कौवे की काँव
बदल गया
मेरा पहले वाला
सुंदर गाँव।
पेड़ काटते
नदियों को पाटते
विकास दाँव
बचाने जग
हो जाइए सजग
बढ़ाएँ पाँव
अंजुमन "आरज़ू'©✍
Comments
Post a Comment