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तिरंगा रंग

कहीं ममता का आंचल है, कहीं राखी के हैं धागे ।
हज़ारो रंग है फीके, तिरंगा रंग के आगे ॥

वो इक लड़की पराई सी, दुल्हन बन घर में आई है ।
कि सरहद ही मेरी दुल्हन, उसे तो बस जुदाई है ।
महावर आलता मेहंदी, हरि चूड़ी में मन लागे ॥1॥
(पर)
हजारों रंग है फीके, तिरंगा रंग के आगे ॥

कभी पत्थर की चट्टाने, कभी बीहड़ के वीरानी ।
हजारों आफतें झेलें, कभी भी हार ना माने ।
हमारे स्वप्न हों रंगी, कि सैनिक इसलिए जागे ॥2॥
हजारों रंग है फीके, तिरंगा रंग के आगे ॥

       -अंजुमन 'आरज़ू'©✍
17/07/2018

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