लोकतंत्र इसे कहते लेकिन, भीड़ तंत्र ये दिखता है ।
दो-दो पैसों की खातिर यहां, इक इक नेता बिकता है ॥
जापानी बुलेट ट्रेन से, सर्व साधारण क्या पाए ।
वो तो जनरल बोगी में ही, एक दूजे के धक्के खाए ।
लोकहित कहने की बातें, स्वाहित मानसिकता है ॥1॥
लोकतंत्र इसे कहते लेकिन, भीड़ तंत्र यै दिखता है ॥
वोट डालकर जनता जिनको, अपना नेता चुनती है ।
बाद चुनावों के वही देखो, अपने सिर को धुनती है ।
लोकतंत्र की सीपी भीतर, मोती नहीं बस सिकता है ॥3॥
लोकतंत्र इसे कहते लेकिन, भीड़ तंत्र यै दिखता है ॥
लोकतंत्र की महिमा देखो, जिसकी लाठी उसकी भैस ।
सच्चाई से कोसों दूर ये, बिकी हुई है सारी प्रेस ।
सत्ता के कहने पर नाचे, धिन धिन धिन ना धिकता है ॥3॥
लोकतंत्र इसे कहते लेकिन, भीड़ तंत्र यै दिखता है ॥
देश भलाई कौन सोचता, सारे दल है बस दलदल ।
गिरगिट से भी तेज बदलते, रंग हजारों हैं पल-पल ।
ऊंचे आदर्शों वाला कब, लोकतंत्र में टिकता है ॥4॥
लोकतंत्र इसे कहते लेकिन, भीड़ तंत्र यै दिखता है ॥
अभी समय है देश सपूतों, उठो देश को फिर सच तो ।
भारत फिर बने सोन चिरैया, फिर ऐसा इतिहास रच दो ।
लोकतंत्र लाचार है क्योंकि, स्वार्थों की अधिकता है ॥5॥
लोकतंत्र इसे कहते लेकिन, भीड़ तंत्र यै दिखता है ॥
-अंजुमन 'आरज़ू'©✍
24/06/2018
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