तुमसे न कोई नाता है,
पर साथ तुम्हारा भाता है ।
तुमसे बिछड़न की बात सोच,
मन कुछ उदास हो जाता है ।
जब आये थे तुम कोई न थे,
पर धीरे धीरे मीत बने।
फिर अर्थपूर्ण कुछ शब्द घने,
संबंधों के नव गीत बने ।।
मुस्कानें तो सब से बाँटी,
दुख दर्द तुम्हीं से बाँटा है ।।
तुमसे बिछड़न की बात सोच,
मन कुछ उदास हो जाता है ।।
नित खुशियों की उजयाली हो,
अब बात न कोई काली हो ।
हर एक दिवस ईदों वाला,
और रात दिवाली वाली हो ।
अब जाते हो तो जाओ सखे!
राहों में न कोई काँटा है ।
तुमसे बिछड़न की बात सोच
मन कुछ उदास हो जाता है ।
तुमसे ना कोई नाता है,
पर साथ तुम्हारा भाता है ।
तुमसे बिछड़न की बात सोच,
मन कुछ उदास हो जाता है ।।
-अंजुमन 'आरज़ू'.
Comments
Post a Comment