Skip to main content

तुमसे ना कोई नाता है

तुमसे न कोई नाता है,
पर साथ तुम्हारा भाता है ।
तुमसे बिछड़न की बात सोच,
मन कुछ उदास हो जाता है ।

जब आये थे तुम कोई न थे,
पर धीरे धीरे मीत बने।
फिर अर्थपूर्ण कुछ शब्द घने,
संबंधों के नव गीत बने ।।
मुस्कानें तो सब से बाँटी,
दुख दर्द तुम्हीं से बाँटा है ।।
तुमसे बिछड़न की बात सोच,
मन कुछ उदास हो जाता है ।।

नित खुशियों की उजयाली हो,
अब बात न कोई काली हो ।
हर एक दिवस ईदों वाला,
और रात दिवाली वाली हो ।
अब जाते हो तो जाओ सखे!
राहों में न कोई काँटा है ।
तुमसे बिछड़न की बात सोच
मन कुछ उदास हो जाता है ।

तुमसे ना कोई नाता है,
पर साथ तुम्हारा भाता है ।
तुमसे बिछड़न की बात सोच,
मन कुछ उदास हो जाता है ।।

             -अंजुमन 'आरज़ू'.

Comments

Popular posts from this blog

सरस्वती वंदना

हों गीत मेरे, संगीत भरे । लय ना लय हो, सरगम मुखरे । माँ शारदा विनती करूँ तुझ से । हों ये गीत अनूप, अटल-ध्रुव से । मेरे गीतों को आशीष दे माँ । ये मोहन हों, मुरली को धरे ॥1॥ लय ना लय हो स...

'इंद्रधनुष' (दोहा गीत)

इंद्रधनुष छाये गगन,खिले धरा का रूप । कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्रारुप ॥ इंद्रधनुष सा नेह तो, सतरंगी संसार । रंग मिलें मिलकर सजें, पायें रूप अनूप ॥ कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्र...

हम्द-02 रब के बंदों से की महब्बत है

रब    के   बंदों  से   की  महब्बत  है अपनी  तो    बस   यही   इबादत  है सारी   तारीफ़   है   ख़ुदा   के   लिए जिसकी  दोनों  जहाँ  में  अज़मत है फूल     पत्तों    में    बेल    बूटों   में देखिए   रब   की   ही    इबारत   है शुक्र है  रब का  जो दिया  सो दिया अपनी क़िस्मत से कब शिकायत है ये   नमाज़ें    ज़कात    हज    रोज़े रब  को   पाने  की  ही   रवायत  है ग़म  में  भी   ढूंढ  ली   ख़ुशी   मैंने ये   हुनर   उसकी  ही   इनायत  है लाख    बेचैनियाँ    सही    लेकिन उसके   एहसास  से  ही   राहत है जिसके...