ग़ज़ल
दिया ये हौसलों से ऐ हवा तुम से लड़ा होगा ।
ये नन्हा दीप आशा का यूँ सूरज से बड़ा होगा ॥
चिरागों को बुझा कर तुम चलो ना चाल मस्तानी ।
न जुगनू से हवा तेरा कभी पाला पड़ा होगा ॥
ख़िज़ा को देख जीवन में कभी भी हार मत मानो ।
हरा होने से पहले ये शज़र सारा झड़ा होगा ॥
उजालों की अहमियत को अंधेरा भी जरूरी है ।
फ़लक़ ये रात ही में तो सितारों से जड़ा होगा ॥
नहीं अंगूर का दाना जो मेरे दाम गिर जाएं ।
मैं हूं वो नारियल तनहा जो गुच्छों से बड़ा होगा ॥
अना से परवरिश पे मैं भी अपनी नाज़ कर लूंगी ।
मेरा बेटा कभी पैरों पे जब अपने खड़ा होगा ॥
लड़ा है मिल्कियत के वास्ते पर याद आता है ।
मरासिम तर्क होने पर भी तो नाता जुड़ा होगा ॥
-अंजुमन 'आरज़ू'©✍
26/04/2019
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