परदेस छोड़ा न जाए, फिर भी कहते- मेरा देश महान🇮🇳
कोई भी व्यक्ति अपनी जननी और जन्मभूमि का वर्ण नहीं कर सकता, वह तो बस मां का बेटा, देश का लाल, हो जाता है, और उसे अपनी मां और मातृभूमि से अपार स्नेही मिलता है, जो अविस्मरणीय होता है ।
वास्तव में "परदेश छोड़ा न जाए" कोई समस्या नहीं है, समस्या तो यह है कि "देश क्यों छोड़ना पड़ा?" यदि उन परिस्थितियों का निर्माण ही ना हो, कि किसी को देश छोड़कर जाना पड़े, तो परदे से लौटने का प्रश्न ही नहीं बचेगा ।
आइए अब विचार करते हैं कि आखिर हम भारतीयों को देश छोड़ना ही क्यों पड़ता है
रोजगार के अवसरों की कमी-- चीन रक्षाबंधन नहीं मनाता पर भारत में राखी चीनी. चीन दिवाली होली आदि भी नहीं मनाता, पर दीपक, रंग, पतंग आदि सब चीनी । हम आए दिन whatsapp में वायरस संदेश पाते हैं, कि इन चीनी सामानों का बहिष्कार करें, पर क्या भारत सरकार की यह जिम्मेदारी नहीं बनती, कि इन पर कड़ाई से रोक लगाई, यदि प्रतिबंध लगा तो दो बड़े काम होंगे ।
एक चीन का एक बड़ा बाजार टूटेगा, जिससे उसे आर्थिक हानि होगी ।
दो भारत का धन पड़ोसी चीन को सामर्थ्य वान बनाने के काम नहीं आएगा। देश में ही रहेगा, और साथ ही असंख्य बेरोजगारों को देश में ही रोजगार मिलेगा । देश समृद्ध होगा तो विदेश पलायन की प्रवृत्ति में कमी आएगी ।
उच्च महत्वाकांक्षा-- हालांकि हमारा धर्म हमें सिखाता है कि संतोष ही परम धर्म है फिर भी हम अपनी उच्च महत्वाकांक्षा के चलते बस भाग ही रहे हैं विदेश भी चले जाएं, कितनी भी धन संपत्ति अर्जित कर ले, पर जीवन में संतुष्टि नहीं है
प्रतिभाओं का दमन भारत में प्रतिभाओं को उचित अवसर नहीं दिया जाता उनके नवीन विचारों का स्वागत नहीं किया जाता यही कारण है कि प्रतिभावान को जब वही अवसर विदेशों से मिलता है तो वे उस का लाभ उठाते हैं परिणाम हमारे सामने है google facebook आदि के शीर्ष पर भारतीयों का होना........
एक घटना मुझे याद आ रही है भारत के एक वैज्ञानिक में टेस्ट ट्यूब बेबी का आविष्कार किया किंतु देश में उसे प्रदर्शित करने पेटेंट करवाने का अवसर नहीं दिया परिणामतः उस डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली काश वह भी विदेश चला जाता तो आज जीवित रहता। साथ ही टेस्ट ट्यूब बेबी के आविष्कारक के रूप में भारतीय मूल का वैज्ञानिक तो कम से कम जुड़ा होता (मेरे इस कथन की पुष्टि के लिए आप एक डॉक्टर की मौत फिल्म देख सकते हैं)
मेरी छोटी बुद्धि में तो देश छोड़ने के यह ही कारण समझ में आते हैं यदि इन कारणों का निवारण देश द्वारा कर दिया जाए तो कोई व्यक्ति देश छोड़कर ही नहीं जाएगा ।
अब रही बात परदेश ना छोड़ा जाए की तो विदेशी कंपनियों के द्वारा करवाए गए अनुबंध कार्य की अधिकता आदि के चलते विदेशों में स्थापित हो चुके लोगों से विदेश छोड़ा नहीं जाता ।
पर उनका भी दिल तो आखिर हिंदुस्तानी ही है अतः कितने ही विदेश में रहने लेकिन अपनी जननी और जन्मभूमि को नहीं भूल सकते इसे हमे उदाहरण द्वारा समझ सकते हैं परंपराएं कुछ ऐसी है कि बेटियों को विदा होकर ससुराल जाना पड़ता है वह अपने ससुराल में कितनी भी सुखी रहें पर अपना मायका नहीं भूलती वैसे ही विदेश जाने वाले कितना ही समृद्ध हो जाए लेकिन अपनी जन्मभूमि को नहीं भूल सकते इसीलिए समय समय पर कहते रहते हैं मेरा भारत महान ।
-अंजुमन 'आरज़ू'©✍
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