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ЁЯМ╣рдЬाрдоुрди

😊
        ढेर सारे अरमान लिए सुहाना, शादी होकर अपने ससुराल आई ।अभी लगभग दो महीने ही गुजरे थे, घर का माहौल हास परिहास का था । आषाढ़ का महीना था, बारिश शुरु हो गई थी, जामुन पकने लगी थी, अतः घर में अन्न फलों के साथ,  जामुन भी आने लगी थी । एक दिन इशान के पिता फलों के साथ,  कुछ मिठाई भी ले आए । इशान को शरारत सूझी .......😊उसने एक पैकेट उठाया, और रसोई में जाकर सुहाना से कहा, "--जामुन है,--बना के ले आओ ।" इशान ने  जानबूझकर *गुलाब* और *कटोरी* शब्द बहुत धीमे स्वर में कहे थे, इतने धीमें, कि सुहाना सुन ना सके । तो जैसा कि इशान में सुनाना चाहा था, सुहाना ने वैसा ही सुना, "जामुन है, बनाकर ले आओ ।" सुहाना ने झटपट पैकेट शिंक के नल के नीचे जामुन धोने के लिए रख दी, उसने देखा.....!!!! अरे!!!!! ये तो गुलाब जामुन हैं !!!!!पर अब इन में पानी पड़ चुका है। तब तक इशान अपनी मम्मी और छोटी बहनों को लेकर रसोई में पहुंच गया, और बनावटी गुस्से के साथ बोला-- "अरे तुम ये क्या कर रही हो, गुलाब जामुन कोई धोता है क्या ???? यही सीख कर आई हो अपने मायके से....??? चूँकि गुलाब जामुन में पानी पड़ चुका था, और सुहाना अभी लगभग नयी ही थी, तो इशान की बात सुनकर, वह रो पड़ी, पर बाकी सब कहकहे लगा रहे थे । सब ने सुहाना को भी हंसने के लिए कहा । दोनों ननंदें भाभी से मनहार करने लगी, और उसे हॉल में ले आयीं । इशान के पापा ने पूछा- "क्या हुआ, सब हँस रहे हैं, और बहू की आंखों में आंसू.....!!! इशान बोला-- "यह गुलाब जामुन के आंसू है पापा 😊"। बहनों ने सारी घटना पापा को सुनाई, तो वो भी हँस पड़े । उधर रसोई में मां ने अपने स्नेही की चाशनी बनाकर, धुले हुए गुलाब जामुन को डुबोया, और कटोरी में सजाकर ले आयीं । सब खिलखिला रहे थे । एक दूसरे से कह रहे थे, "लो भाई, धुली हुई, नमक में बनी, जामुन खाओ ।"
      आज भी जब जामुन, या गुलाब जामुन, घर आती है, तो सबके चेहरे पर वही स्निग्ध मुस्कान छा जाती है, और हां अब ये दोनों फल और मिठाई एक दूसरे के नाम से पुकारी जाती हैं घर में ...।😊😊😊
          -अंजुमन 'आरज़ू'✍
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