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सोना धरती कर दी पीतल

बड़, आम, आँवला और पीपल,
रत्नों पर भारी तुलसी - दल ।
हर पेड़ का हमसे नाता है ,
हर पेड़ सुखों का दाता है ।।
कचनार, अनार, कदली सेमल ,
छाया इनकी अमृत शीतल ।।

जहाँ प्रकृति पूजी जाती है,
कपास से बनती बाती है।
हर पेड़ प्रभु का निवास है,
जिसपर हमको विश्वास है ।
दूर्बा गणपति जी को भाती,
कृष्णा ने लिखी पीपल पाती ।
लक्ष्मी जी को भाता गुडहल ।।
रत्नों पर भारी तुलसी - दल।।

जहाँ नीम की ठंडी छाया है,
वहाँ निरोगी रहती काया है ।
ऋषियों ने आयुर्वेद लिखा,
हर पेड़ का औषधीय भेद लिखा ।
भृंगराज,शंखपुष्पी, ब्राह्ममी ,
विश्व मे सिरमोर हमीं हैं हमीं ।
सम्मान मे आगे है श्रीफल ।।
रत्नों पर भारी तुलसी -दल।।

नदियों खुद ही अब प्यासी हैं,
पेड़ों की आँखें उदासी हैं ।
अतिवृष्टि अल्पवृष्टि छेलें ,
खुद अपने भविष्य से हम खेलें ।
धर्मों की भूले सब सीखें,
अब व्यथित हुए रोऐं चीखें ।
सोना धरती कर दी पीतल ।।
रत्नों पर भारी तुलसी -दल ।।

बड़ आम आँवला और पीपल,
रत्नों पर भारी तुलसी -दल ।
छाया इनकी अमृत शीतल ।।

    -अंजुमन 'आरज़ू'©✍

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