1
बेटी कबीर की साखी
भाई कलाई की राखी
है बुढ़ापे की बैसाखी
नखरे उठाइये।
2
हे तुलसी सी द्वार की
शीतलता बयार की
सच्ची मूरत प्यार की खुशियां लुटाइये ।
3
मीठी बातें करती है
किसी से ना डरती है
आगे आगे बढ़ती है
सपने सजाइये।
4
इन की छवि न्यारी है
ये केसर की क्यारी है
लगती हमें प्यारी है
बिटिया बचाइये।
-अंजुमन 'आरज़ू'©✍
09/05/2018
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