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लिखी ईश को पाती

पुनर्जन्म लेने वाली तो, बात ना हम को भाती है।
पर यदि इस में सच्चाई तो, मेरी कलम ये गाती है।
सात जन्म के बंधन वाला तो, नहीं मेरा कोई साथी है।
मुझको ये ही माँ-पा देना, लिखी ईश को पाती है ॥

मुझे अकेला कभी न छोड़े, मेरी प्यारी सी बहना ।
श्री हीन इस जीवन में, वो ही तो है सच्चा गहना ।
सात जन्म तक साथ रहेंगे, वो भी ये दोहराती है ।
मुझको ये ही माँ-पा देना, लिखी ईश को पाती है ॥

माँ का प्यारा बेटा राजा, चंदा मेरा भाई है ।
घर की सारी जिम्मेदारी, पापा सी निभाई है ।
सात जन्म की साथी उनकी ,भाभी भी तो भाती है।
मुझको ये ही माँ-पा देना, लिखी ईश को पाती है ॥

भैया की बिटिया आना, है नटखट करती नादानी।
और बहन का बेटा, आनू भी तो करता शैतानी।
ये सब मुझको सात जन्म दे, दुआ ये लब पे आती है।
मुझको ये ही माँ-पा देना, लिखी ईश को पाती है ॥

छोटा राखी भाई मेरा, उससे भी है चाहतें।
बहन-जमाई सुखी रहे तो, मन को मिलती राहतें ।
हर मुश्किल में साथ खड़े हैं, सुख दुख के ये साथी हैं ।
मुझको ये ही माँ-पा देना लिखी ईश को पाती है ॥

घर से बाहर भी तो मुझको, मिश्री से मीठे बोल मिले ।
मित्र मंडली सीमित लेकिन, रिश्ते कुछ अनमोल मिले ।
इन नातों को देख 'आरज़ू',खुश होकर हर्षाती है।
मुझको ये ही माँ- पा देना, लिखी ईश को पाती है ॥

     -अंजुमन 'आरज़ू'©✍
27/04/2018

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