सुनो !!!
मध्यमा और तर्जनी की तरह
मिलकर जो तुम दोनों
मुस्का रहे हो ना
दिल मिला रहे हो ना
अच्छा है, बहुत अच्छा है
मुस्काओ, दिल मिलाओ
पर याद रखो ...
तुम्हारे मिलन के पीछे
पूरा हाथ है कुदरत का
जिसमें परिवार रूपी
तीन अंगुलियां और भी हैं
जो माता-पिता और
संतति का प्रतिनिधित्व कर रहीं हैं
जो तुम्हारे मुस्काने से मुस्काती हैं
पर ये याद रखना तुम
कि तुम्हारी मुस्कान के *फूल* से
अंगूठे और अनामिका रूपी
माता पिता को
उपेक्षा के शूल ना चुभने पाएं ...
याद रखना
कि तुम आदम और हव्वा नहीं हो
कि जिन पर मां बाप की कोई
जिम्मेदारी न हो
यदि तुम अपने प्रेमालाप में
इन दोनों को विसार दोगे न .....
तिरस्कार करोगे न.....
तो कल
कनिष्ठा रूपी संतति तुम्हारी
तुमसे सीख कर
सूद समेत
लौटा देगी सब....
तुम्हें लौटा देगी सब....
©-अंजुमन 'आरज़ू'✍
03/05/2019
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