मैं हूं फूल गुलाब का पर, आसपास कई कांटे हैं ।
हमको मसला जाता क्योंकि, खुशबू हम ने बांटे हैं ॥
एक कुकुरमुत्ते को यारों, जाने हम क्यों खलते हैं ।
शीतलता है हम में फिर भी, जाने क्यों ये जलते हैं ।
देखो इनके किरदारों को, ये तो कितने नाटे हैं ॥1॥
हमको मसला जाता क्योंकि, खुशबू हम ने बांटे हैं ॥
जिसको देखो आ कर के, हम को छू कर के जाता है ।
छूना तो चलो माफ किया पर, तोड़ मरोड़ बिखराता है ।
मेरे मन में इनके लिए, ना जाने कितनी डांटे हैं ॥2॥
हमको मसला जाता क्योंकि, खुशबू हम ने बांटे हैं ॥
संघर्षों के बाद निखर के, सुरभित हुई कहानी थी ।
डाली खिल के महक रही थी, रंगत बड़ी सुहानी थी ।
गुलाबजल गुलकंद बनाने, निर्ममता से काटे हैं ॥3॥
हमको मसला जाता क्योंकि, खुशबू हम ने बांटे हैं ॥
-अंजुमन 'आरज़ू'© ✍
22/06/2018
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