प्रथम पूज्य ने मात-पिता को पूज के जग में नाम किया ।
हम किस मंदिर जाएं हमने घर को चारों धाम किया ॥
जन्म दिया ब्रह्मा सा पालन विष्णु जैसा करते हैं ।
शिव से संहारक बनकर मम पीड़ाओं को हरते हैं।
क्यों ना मानूं ईश इन्हें जब ईश सा सारा काम किया ॥1॥
हम किस मंदिर जाएं हमने घर को चारों धाम किया ॥
अन्नपूर्णा रूप तुम्हारा बचपन से ही देखा है ।
दादी कहती थी लक्ष्मी और मेरी तो तू लेखा है ।
गौरा सी शीतलता तुम में दुर्गा सा संग्राम किया ॥2॥
हम किस मंदिर जाएं हमने घर को चारो धाम किया ॥
-अंजुमन आरज़ू'©✍
10/07/2018
Comments
Post a Comment