हाइकु
एक से एक
कितने किरदार
रुप अनेक
बेटी बहना
कोयल सी कूँकती
घर गहना
यौवन छाया
सजती संवरती
प्रेयसी माया
छोड़ नादानी
परिणय में बंधी
हुई सयानी
बहू बनी है
ननंद देवर से
खूब छनी है
आया वो सुख
जब मां बनकर
भुलाए दुख
जीवन सारा
रह संघर्ष रत
बच्चों पे वारा
बेटी विदाई
अब सास बनी है
बहू भी आई
ढलती शाम
फलाँ की दादी नानी
हुए हैं नाम
नारी जीवन
हर रूप है भाता
इसे नमन।🙏
- अंजुमन 'आरज़ू'©✍
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