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Showing posts from May, 2019

शम्'अ रोशन कर दी हमने

वज़न- 2122 2122 2122 212 ग़ज़ल शम्'अ रोशन कर दी हमने तीरगी के सामने । टिक ना पाएगा अंधेरा रोशनी के सामने ॥ बिन थके चलते रहे गर मंजिलों की चाह में । हार जाती मुश्किलें भी आदमी के सामने ॥ पर्वत...

हल्दी

लघुकथा        एक बहन एक भाई वाले एक आदर्श परिवार में बड़े अरमानों से भाई का विवाह हुआ । गोरी सुंदर दुल्हन घर आई,  नये रिश्ते बने, माता-पिता को बहू, बहन को भाभी मिली । और भी नए रिश...

बिगड़ गई बात

बिगड़ गई बात बातों ही बातों में देखो बिगड़ गई बात । टूटे रिश्ते पल में छूटा जीवन भर का साथ ॥ कुछ तुमने हमसे कहा, कुछ हमने तुम से कहा । मानी ना अपनी खता, एक दूसरे से यूँ कहा । तुमने ...

लिखी ईश को पाती

पुनर्जन्म लेने वाली तो, बात ना हम को भाती है। पर यदि इस में सच्चाई तो, मेरी कलम ये गाती है। सात जन्म के बंधन वाला तो, नहीं मेरा कोई साथी है। मुझको ये ही माँ-पा देना, लिखी ईश को पाती ...

हाइकु

     पत्नी ये बोली सुन ओ हमजोली     होके नरम ।      दोस्तों की टोली करती है ठिठोली      खुली है रम|      बीड़ी शराब होते सब खराब     फैंको चिलम|     होता है बुरा सिगरेट का कश     न...

दो जून की रोटी

दो जून की रोटी मिलती, हम हैं किस्मत वाले । कितने लोग भूखे रहते हैं, मिलते नहीं निवाले ॥ हाथ ठेला लिए धूप में, आम-जाम चिल्लाए । तब जाकर घर वालों को वो, आधा पेट खिलाए । रोटी की खातिर ...

नवजीवन

यूं ही गुमसुम सी बैठी थी । सोच रही थी क्या जीना है । बिटिया आंचल धाम के बोली । मम्मी मुझको मम पीना है ॥1॥ खुद को छोड़ कहीं खो जाऊं । चिर निद्रा में मैं सो जाऊं । पर क्या होगा फिर इ...

जुनून

नामुमकिन को मुमकिन कर दे ऐसा जज़्बा जुनून है । कोशिश करने वालों के तो सारे रंग मरून हैं ।। अपनी अपनी ज़िद पे अड़े हैं सीमा के दोनों ही छोर । वो भी अपनी माँ के बेटे हम भी तो हे सिर...

हिम्मत को सलाम

भीगे परों से उड़ के तूने छू लिया आसमान । हिम्मत को सलाम है तेरा हौसला है महान ।। कोई नहीं सूरज का साथी तन्हा तमतमाता है । पर्वत के शिखरों पे चढ़ पाताल का तम भगाता है ।। जग का अके...

पापा से बेहद प्यार है

माना कि यह जीवन, संकुचन नहीं विस्तार है । किन्तु मुझको अपने पापा से बेहद प्यार है ॥ गोदावरी ने विस्तार रोका, ऋषि अगस्त के कमंडल में । मेरा भी विस्तार रुक रहा, परिस्थितियों के ...

सोना धरती कर दी पीतल

बड़, आम, आँवला और पीपल, रत्नों पर भारी तुलसी - दल । हर पेड़ का हमसे नाता है , हर पेड़ सुखों का दाता है ।। कचनार, अनार, कदली सेमल , छाया इनकी अमृत शीतल ।। जहाँ प्रकृति पूजी जाती है, कपास ...

फूलों संग शूलें

कौन है दुनिया में ऐसा जो बस झूलों में झूले । सहना पड़ता है सबको ही फूलों के संग शूले ।। फूल का रूप खिलाने को ज्यों धूप ज़रूरी है । जीवन में भी बिन संघर्ष हर बात अधूरी है । मुस्क...

जीवन का गीत

जीवन का गीत सुनातीं हैं समन्दर की लहरें । धीरज से गुनगुनाओ ये ग़ज़ल की दो बहरें ।। अपने खारे पन की पीड़ा कह नहीं पाता । दूर तक फैला है लेकिन बह नहीं पाता । इतना बड़ा होकर भी कह...

तुमसे ना कोई नाता है

तुमसे न कोई नाता है, पर साथ तुम्हारा भाता है । तुमसे बिछड़न की बात सोच, मन कुछ उदास हो जाता है । जब आये थे तुम कोई न थे, पर धीरे धीरे मीत बने। फिर अर्थपूर्ण कुछ शब्द घने, संबंधों के ...

नारी की परिभाषा

क्या बांधेगी नारी तुझको  कोई एक परिभाषा । सहन शक्ति तू,सृजन शक्ति तू,तू आशा की भाषा ॥ स्नेहमयी ममता की मूरत, प्रेम की छाया ठंडी । पतन पाप पाखंड जले जब,बन जाती रंणचण्डी। अबला न...

अब सांझ ढली

अब साँझ ढली घर चल साथी, पूजन वंदन दीया बाती । कल भी तो बिटिया बोली थी, माँ याद तुम्हारी है आती ॥ प्रतिस्पर्धा कैसी छाई है, दोनों को करनी कमाई है । तब होते हैं सपने साकार, तब घर ले...

गरीबी-गौरव गान

गरीबी  तो गौरव गान है । इसका बहुत सम्मान है । शबरी सा धीरज धर  के, कुछ तप भी करना पड़ता है । आस प्रभु की मन भरके, जग से लड़ना पड़ता है । तब बेर खाते श्री राम है ।। इसका बहुत सम्मान ह...

धरती की संतान

हम वसुधा के रहने वाले  धरती की सन्तान हैं । पर शायद हम ने खो दी अपनी सुखद पहचान है ॥ नदियों की लहरों में जागा गीत नया संगीत नया । पर्वत सागर करते हैं संघर्ष के लाखों गीत बयां ॥ ...

पतझड़-बहार

पतझड़ को भी बहारों सा सजाते हैं । चलो आज मुश्किलों को हराते हैं ।। भागिरथी प्रयास कर गंगा धरा पल लाएँ । सूखाग्रस्त वंजर धरती को फिर हरियाएँ ।। चलो हौसलों का पर्याय बन जाते ह...

जीवन-नौका

ताटंक छंद विधान:- सम मात्रिक छंद, 16-14 की यति से 30 मात्राएं, पदांत में यगण अनिवार्य, कुल 4 चरण, क्रमागत युगल चरण सम तुकांत । _______________________________                     जीवन-नौका प्रकृति चैत्र मास में ज...

पहचान

आज-कल मैं कुछ मुस्कुरा के चलती हूँ । झुका के नहीं सिर उठा के चलती हूँ । अहं से नहीं... अहम से । मैं मुस्कुरा के चलती हूँ क्योंकि अब मेरी अपनी अहम पहचान है.... अब भी मैं अपने पिता की ब...