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ग़ज़ल-05 -मुझे गर वक़्त अव्वल लिख रहा है

मुझे  गर   वक़्त  अव्वल    लिख   रहा  है
मेरे  वालिद  को  अफ़ज़ल   लिख  रहा  है

मेरा    किरदार   उनका   नारियल - दिल
बड़ी   सख़्ती  से   कोमल   लिख  रहा  है

मेरे   अब्बा   की  रूदाद -ए - मशक्कत
पुराना    एक    पीपल    लिख    रहा   है

है  जो  रोज़ी  की   छागल   पास   उनके
मेरा  दिल  उसको  बादल   लिख  रहा है

मेरे   वालिद  की   मेहनत   का   पसीना
मुअत्तर   एक    संदल    लिख   रहा   है

जो  मुझ में  है  उन्हीं  सा  इक  जियाला
सरल मुश्किल को  हर पल लिख रहा है

अधूरी    'आरज़ू'   को   अज़्म   उनका
मुनव्वर  और   मुकम्मल  लिख  रहा है

-©अंजुमन 'आरज़ू'    23/01/2021
 रौशनी के हमसफ़र /2021
पृष्ठ क्र• 18 /ग़ज़ल-05
 वज़्न-1222 1222 122

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