Skip to main content

ग़ज़ल-05 -मुझे गर वक़्त अव्वल लिख रहा है

मुझे  गर   वक़्त  अव्वल    लिख   रहा  है
मेरे  वालिद  को  अफ़ज़ल   लिख  रहा  है

मेरा    किरदार   उनका   नारियल - दिल
बड़ी   सख़्ती  से   कोमल   लिख  रहा  है

मेरे   अब्बा   की  रूदाद -ए - मशक्कत
पुराना    एक    पीपल    लिख    रहा   है

है  जो  रोज़ी  की   छागल   पास   उनके
मेरा  दिल  उसको  बादल   लिख  रहा है

मेरे   वालिद  की   मेहनत   का   पसीना
मुअत्तर   एक    संदल    लिख   रहा   है

जो  मुझ में  है  उन्हीं  सा  इक  जियाला
सरल मुश्किल को  हर पल लिख रहा है

अधूरी    'आरज़ू'   को   अज़्म   उनका
मुनव्वर  और   मुकम्मल  लिख  रहा है

-©अंजुमन 'आरज़ू'    23/01/2021
 रौशनी के हमसफ़र /2021
पृष्ठ क्र• 18 /ग़ज़ल-05
 वज़्न-1222 1222 122

Comments

Popular posts from this blog

गरीबी गौरव गान

गरीबी  तो गौरव गान है । इसका बहुत सम्मान है । शबरी सा धीरज धर  के, कुछ तप भी करना पड़ता है । आस प्रभु की मन भरके, जग से लड़ना पड़ता है । तब बेर खाते श्री राम है ।। इसका बहुत सम्मान ह...

ग़ज़ल-13 ग़ौर से देखा तो ये सारा जहाँ तन्हा मिला

ग़ौर  से   देखा  तो   ये    सारा   जहाँ   तन्हा   मिला चाँद    तन्हा   रात   तन्हा   आसमाँ    तन्हा    मिला वो जो  महफ़िल  में  लगाता  फिर  रहा  था कहकहे राज़-ए-ग़म उसके भी  दिल में  हाँ निहाँ तन्हा मिला अपनी  तामीर -ए- ख़ुदी  में  हर  बशर मसरूफ़ है साथ  कितने  फ़र्द   हैं   पर  आशियाँ  तन्हा  मिला चश्मदीदाँ  थे   बहुत   उस    हादसे   के   भीड़  में  ख़ौफ़  के  मारे  मगर  बस  इक  बयाँ   तन्हा मिला साथ  पर्वत  कब   चले  हैं  राह  में  ये   सोच कर बह्र  की  चाहत में  इक  दरिया  रवाँ  तन्हा  मिला दूर    तन्हाई     करे    ऐसा    ...

कुछ मेरी भी तुम सुन लेते

सरला नारी को उन* लेते, सब निर्णय तुम खुद बुन लेते । मैंने  तेरे  मौन  पढ़ें  हैं, *कुछ मेरी भी तुम सुन लेते ॥* मेरा हर सृंगार तुम्ही से , बिछुए कंगन हार तुम्ही से । फिर भी मुझको भेज ...