Skip to main content

03-नअ़त-ए-पाक

ख़ल्क़  के  पेशवा   की   आमद  है 
ख़ातिम-उल-अंबिया की  आमद है

रहमतों  की  ब-हर  सू  है   बारिश
अहमद-ए-मुजतबा  की  आमद है

जिस ने हम पर  हयात की  आसाँ
ऐसे  मुश्किल कुशा  की  आमद है

जगमगा    उठ्ठा   है    जहाँ   सारा
आज  नुरुल-हुदा  की   आमद  है

चाँद शक़ उंगली से  किया जिसने
ऐसे  मो'जिज़-नुमा  की  आमद है

जिस पे क़ुरआन का  नुज़ूल हुआ
उस  हबीबे  ख़ुदा  की  आमद  है 

क़ल्ब से भेजिए दरूद-ओ-सलाम
सय्यद-उल-अंबिया  की आमद है

जिस को मेराज  रब ने है  बख़्शी
ऐसे कैफ़-उल-वरा  की आमद है 

क्यों न  मसरूर*  'आरज़ू'  होगी 
मरहबा  मुस्तफ़ा  की  आमद  है 

मसरूर - आनंदित

 -© अंजुमन 'आरज़ू'    29/10/2020
रौशनी के हमसफ़र/2021, पृष्ठ क्र• 16/ ग़ज़ल-03
वज़्न -2122 1212 22/112

Comments

Popular posts from this blog

सरस्वती वंदना

हों गीत मेरे, संगीत भरे । लय ना लय हो, सरगम मुखरे । माँ शारदा विनती करूँ तुझ से । हों ये गीत अनूप, अटल-ध्रुव से । मेरे गीतों को आशीष दे माँ । ये मोहन हों, मुरली को धरे ॥1॥ लय ना लय हो स...

'इंद्रधनुष' (दोहा गीत)

इंद्रधनुष छाये गगन,खिले धरा का रूप । कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्रारुप ॥ इंद्रधनुष सा नेह तो, सतरंगी संसार । रंग मिलें मिलकर सजें, पायें रूप अनूप ॥ कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्र...

हम्द-02 रब के बंदों से की महब्बत है

रब    के   बंदों  से   की  महब्बत  है अपनी  तो    बस   यही   इबादत  है सारी   तारीफ़   है   ख़ुदा   के   लिए जिसकी  दोनों  जहाँ  में  अज़मत है फूल     पत्तों    में    बेल    बूटों   में देखिए   रब   की   ही    इबारत   है शुक्र है  रब का  जो दिया  सो दिया अपनी क़िस्मत से कब शिकायत है ये   नमाज़ें    ज़कात    हज    रोज़े रब  को   पाने  की  ही   रवायत  है ग़म  में  भी   ढूंढ  ली   ख़ुशी   मैंने ये   हुनर   उसकी  ही   इनायत  है लाख    बेचैनियाँ    सही    लेकिन उसके   एहसास  से  ही   राहत है जिसके...