1- ज़िक्र-ए-हक़ सुब्ह-ओ-शाम होता है
2- रब के बंदों से की मुहब्बत है
3- ख़ल्क़ के पेशवा की आमद है
4- इस जहाँ में कोई माँ सा पारसा मुमकिन नहीं
5- मुझे गर वक़्त अव्वल लिख रहा है
6- शम'अ जुगनू चाँद तारे रौशनी के हमसफ़र
7- गले मिलीं हैं यहाँ दो ज़बान काग़ज़ पर
8- इन क़िताबों में निहाँ है ज़िंदगी का फ़लसफ़ा
9- जीती तलवार से हर बार क़लम की ताक़त
10- आसमाँ पर बादलों की चित्रकारी चिट्ठियाँ
11- ज़िंदगी का जैसा भी आग़ाज़ हो
12- दिल में जो मेरे सच्चा इक़दाम नहीं होता
13- गौर से देखा तो ये सारा जहाँ तन्हा मिला
14- बिन तुम्हारे ये लगे सारी ही महफ़िल तन्हा
15- बस हौसलों से चाहता पहचान परिंदा
16- सहर से शाम तक सूरज सा चलना भी ज़रूरी है
17- लब पे नग़्मा सजा लीजिए
18- जुनूँ हवस के ये बेटी निगल न जाएँ कहीं
19- ज़िंदगी इक कयास लगती है
20- हो गया नाकाम आख़िर किस लिए
21- यूँ तो दुनिया को मुख़्तसर देखा
22- लगन मंज़िल की हो जिनको सफ़र की बात करते हैं
23- उसी के याद रखता है जहाँ अंदाज़ बरसों तक
24- शम'ए-उम्मीद गर दिल में जल जाएगी
25- अपनी क़िस्मत को ख़ुद बदलता है
26- सबका फ़िरदौस जहाँ हो ये ज़रूरी तो नहीं
27-ये सब जो हो रहा है क्या वतन से ये मुहब्बत है
28- इस तरफ़ डूब के उस ओर निकलते देखा
29- हौसला दे कभी फौलाद बनाया था जिसे
30- पल में दाँ हूँ पल में नादानी हूँ मैं
31- हौसले दिल में है लेकिन ज़ख़्म सा है आँख में
32- हर क़दम पर पेश आयीं कितनी ही मुश्किल मुझे
33- रंज़-ओ-ग़म इस क़दर गर उठाते न हम
34- ग़म का तकिया बनाओ सो जाओ
35- ये हवा कैसी चली है आज-कल
36- एक बस वो है राहबर तन्हा
37- ज़िया समेट के सूरज गुज़रने वाला था
38- बागबाँ, गर न तवज्जोह की, मर जाएगा
39- किसी के हक़ में भला नहीं है
40- रहगुज़र में बढ़ते जाना सीख लो
41- हर इक हाथ तेग़-ओ-सिपर देखते हैं
42- ख़िरद बता न सकी इंतिक़ाम किसका है
43- थके बिन तय किया तन्हा सफ़र आहिस्ता-आहिस्ता
44- नज़ाकत हूँ तमाज़त हूँ इबादत हूँ मैं औरत हूँ
45- मुझे चैन आया कहाँ मेरे बाद
46- शैताँ बना दिया या फ़रिश्ता बना दिया
47- दरिया की ये रवानी इस को बचाए रखना
48- दुश्मनी से बचा कीजिए
49- कच्चे आँगन की महक और रातरानी ले गया
50- लो रौशनी के वास्ते सजा के रख दिया दिया
51- हर एक अज़्म मेरा क़ामयाब हो जाए
52- धूप ग़म की जो बशर हँस के सहा करता है
53- मुश्किलें भूल के सब ज़ीस्त को बानी देना
54- रेत सा कोई हवाओं में बिखर जाता है
55- ज़िंदगी इस तरह बिताती हूँ
56- थका हुआ था वो परिंद उड़ गया अभी-अभी
57- रंजिश में कब हुआ कोई इल्ज़ाम आख़िरी
58- कर न ऐसे तू किनारा ज़िंदगी
59- मैं नदी हूँ समुंदर बुलाये मुझे
60- सितारों से बुलंद अपनी वही तक़दीर रखते हैं
61- ख़ुद फ़ैसला कर बंदे किस सू तुझे जाना है
62- मझधार में भी कश्ती हर बार चल रही है
63- सुब्ह से शाम तलक आग उगलते क्यों हैं
64- मिली हर शह्र को वीरानियाँ सब ख़ैरियत तो है
65- हाथ पर हाथ धरे रहने का फल क्या होगा
66- देखें तो बह्र-ए-ज़ीस्त में मझधार कम नहीं
67- तय है मंज़िल तो फ़क़त राह पे चलते रहिए
68- ज़िंदगी रोज़ ही रुलाये तो
69- कहीं है तिश्नगी, दरिया नहीं है
70- मायूसियों का साथ निभाना बहुत हुआ
71- राहत से, बेकली से मुलाक़ात हो गयी
72- कोई राहत न रही कोई रियायत न रही
73- हौसलों की बात कर मुश्किल बयानी किस लिए
74- बला से गर चे किश्ती ज़ीस्त की मझधार होती है
75- गया जो वक़्त वापस लौटकर फिर आ नहीं सकता
76- चाहे ग़म की हो सियह शब वलवला रक्खा करें
77- हर एक शक्ल में इंसाँ के रूबरू क्या है
78- हुक्मरानों से हुई तक़रार दफ़्तर में
79- वो जो तहज़ीब के फल से ख़ाली रही
80- सदी भर की बेक़रारी ये हमारी ज़िंदगी है
81- शम्स डूबे भी तो जगमगाया करो
82- दिल इबादत में जितना उतरता रहा
83- वतन की ओर से उनको सलाम आया है
84- जिसने रखी हो ज़ेहन में तदबीर हमेशा
85- फ़राइज़ से अपने मुकर जाने वाले
86-यूँ तो यकजहती के नारे लिक्खे हैं दीवारों पर
87- हौसले अपने ज़रा तुम आज़माने की कहो
88- जो हम किताब-ए-ज़ीस्त का निसाब माँगने लगे
89- मुसीबत में निभाने की ज़बाँ कोई नहीं देगा
90- जब कोई कारवाँ से उठता है
91- ख़ुदा जिगर में मुनव्वर दिखाई देता है
92- मुश्किलों की आँधियों से बच निकलना आ गया
93- सबने ख़ुदा तुझे ही पुकारा है इन दिनों
94- हज़ारों मुखौटे बदलते हुए
95- सब छोड़कर जो रब की मुहब्बत में आ गये
96- अपनों से खा के धोखे हुए थोड़े दाँ से हम
97- क्या-क्या बयाँ करूँ मैं कि क्या है मेरे खिलाफ़
98- बस एक उस ख़ुदा के सहारो की आरज़ू
99- अपनी हद-ए-निगाह में लाने का शुक्रिया
100- बख़्श दे ज़ीस्त जहाँ को न क़ज़ा दे मौला
रौशनी के हमसफ़र
पृष्ठ क्रमांक 10 से 13
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