Skip to main content

सरस्वती वंदना


हों गीत मेरे, संगीत भरे ।
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।

माँ शारदा विनती करूँ तुझ से ।
हों ये गीत अनूप, अटल-ध्रुव से ।
मेरे गीतों को आशीष दे माँ ।
ये मोहन हों, मुरली को धरे ॥1॥
लय ना लय हो सरगम मुखरे ॥

आशा की किरण,भर दूँ सब में ।
प्रतिभा निखरे, मांगू रब मैं ।
रेखा चिंता की, सबकी हरूँ ।
ये गीत मेरे, दीपक से बरे ॥2॥
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।

ममता से भरे, मेरे गीत सरल ।
वर्षा हो सुधा की, न  कोई गरल ।
करूँ वंदना मैं, मेरे गीत सभी ।
हो रेणु-रजत, सुरभि बिखरे ॥3॥
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।

मेरे गीत बने, सुंदर नागर ।
छलके ना फूहड़ता गागर ।
शालीन हों ये, लवलीन बनें ।
मेरी गीत लता, में श्वेता फरे ॥4॥
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।

मेरे छंद नवीन, ग़ज़ल पारस ।
सरिता के किनारे, ज्यों सारस ।
करूँ साधना यूँ, गरिमा पाऊँ ।
मैं प्रवीण बनूँ,तू मुझे जो वरे ॥5॥
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।

हों गीत मेरे, संगीत भरे ।
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।

रचना स्वरचित एवं मौलिक है
©®🙏
    -अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू'✍
छिंदवाड़ा मप्र

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

'इंद्रधनुष' (दोहा गीत)

इंद्रधनुष छाये गगन,खिले धरा का रूप । कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्रारुप ॥ इंद्रधनुष सा नेह तो, सतरंगी संसार । रंग मिलें मिलकर सजें, पायें रूप अनूप ॥ कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्र...

हम्द-02 रब के बंदों से की महब्बत है

रब    के   बंदों  से   की  महब्बत  है अपनी  तो    बस   यही   इबादत  है सारी   तारीफ़   है   ख़ुदा   के   लिए जिसकी  दोनों  जहाँ  में  अज़मत है फूल     पत्तों    में    बेल    बूटों   में देखिए   रब   की   ही    इबारत   है शुक्र है  रब का  जो दिया  सो दिया अपनी क़िस्मत से कब शिकायत है ये   नमाज़ें    ज़कात    हज    रोज़े रब  को   पाने  की  ही   रवायत  है ग़म  में  भी   ढूंढ  ली   ख़ुशी   मैंने ये   हुनर   उसकी  ही   इनायत  है लाख    बेचैनियाँ    सही    लेकिन उसके   एहसास  से  ही   राहत है जिसके...