संरक्षित कर लो जल बरना जग जाएगा जल ।
आज सजग हो जाओ नहीं तो पछताओगे कल ॥
झीलों की आंखों में आंसू घोर उदासी है ।
अल्लह्ड़ता छोड़ी नदियों ने और रुआंसी है ।
सूखे होंठ कुओं के भी तो और प्यासे हैं तल ॥
आज सजग हो जाओ नहीं तो पछताओगे कल ॥
आज अगर हम पानी यूँ बर्बाद करेंगे ।
कल की पीढ़ी पर न हम इंसाफ करेंगे ॥
इतिहास न हमको माफ करेगा गर घोला ये गरल ॥
आज सजग हो जाओ नहीं तो पछताओगे कल ॥
संरक्षित कर लो जल बरना जग जाएगा जल ।
आज सजग हो जाओ नहीं तो पछताओगे कल ॥
रचना स्वरचित एवं मौलिक है ।
©®🙏
-सुश्री अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू'✍
छिंदवाड़ा मप्र
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