हरी भरी हो ज़िंदगी, मांगू हरि से आज ।
इंद्रधनुष के रंग हों, बजे खुशी के साज ॥1॥
बाल सखा संग फाग में, लाल हुआ है लाल ।
देख जसोदा चूमती, है कान्हा का भाल ॥2॥
देखो बैठे साजना, छुपकर पीपर डार ।
हर्षित हो गोरी हँसे, सब रँग पी पर डार ॥3॥
रचना तिथि 20/032019
रचना स्वरचित एवं मौलिक है ।
©®🙏
-सुश्री अंजुमन मंसूरी आरज़ू✍
छिंदवाड़ा मप्र
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