वज़्न - 2122 2122 212
अर्कान - फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
बह्र - बह्रे रमल मुसद्दस मख़्बून महज़ूफ़
क़ाफ़िया - आना स्वर की बंदिश
रदीफ़ - सीखिये
ग़ज़ल
अपनी तन्हाई सजाना सीखिए ।
रहगुजर में बढ़ते जाना सीखिए ॥
मुश्किलें सब धूल बन उड़ जाएंगी ।
बस ज़रा हिम्मत दिखाना सीखिए ॥
ज़िंदगी के साज़ में इक सुर हो कम ।
फिर भी सरगम को बजाना सीखिए ॥
पोंछ कर आंसू ज़रा मुस्काइए ।
दूसरों को भी हंसाना सीखिए ॥
आपके कदमों को चूमेगा गगन ।
क़द फकत अपना बढ़ाना सीखिए ॥
रक्स करती है ज़मी भी झूम कर ।
पर फलक पहले झुकाना सीखिए ॥
'आरज़ू' होगी मुकम्मल एक दिन ।
बस लगन से लौ लगाना सीखिए ॥
रचना तिथि 19/01/2019
रचना स्वरचित एवं मौलिक है ।
-सुश्री अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू'✍
छिंदवाड़ा मप्र
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