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"प्यार जगायें होली में"

चलो दिलों में प्यार जगायें होली में ।
नफरत की दीवार गिरायें होली में ॥

बरसो से भीगी लकड़ी सा सुलगे मन ।
स्वार्थ ईर्ष्या द्वेष भरा सारा जीवन ॥
रीत नयी इस बार चलाई जाएगी ।
ऐसी हर अग्नि बुझायी जाएगी ।
पाप पतन पाखंड जलायें होली में ।
खुशियों का अंबार लगायें होली में ॥

खून के रिश्ते तकरारों से टूटे हैं ।
घर गुलशन के बिखरे बूटे बूटे हैं ॥
चलो नेह का रंग भरें मन पिचकारी ।
एहसासों से फ़िर महकाएँ फुलवारी ।
अपनों से हम खुद मिल आयें होली में ।
बचपन के नगमे दोहरायें होली में ॥

टेसू गुड़हल के संग पत्ते हरियाते ।
देख धरा के दृश्य हमें हैं समझाते ।
ये गुलाबी लाल हरे ओ केसरिये ।
ये सब तो हैं इस रंगोत्सव के ज़रिये ।
केसरिया संघ हरा मिलायें होली में ।
ध्वज अपना मिलजुल फहरायें होली में ॥

चलो दिलों में प्यार जगायें होली में ।
नफरत की दीवार गिरायें होली में ॥

रचना स्वरचित एवं मौलिक है ।
©®🙏
   -अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू' ✍
छिंदवाड़ा मप्र

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