हों गीत मेरे, संगीत भरे ।
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।
माँ शारदा विनती करूँ तुझ से ।
हों ये गीत अनूप, अटल-ध्रुव से ।
मेरे गीतों को आशीष दे माँ ।
ये मोहन हों, मुरली को धरे ॥1॥
लय ना लय हो सरगम मुखरे ॥
आशा की किरण,भर दूँ सब में ।
प्रतिभा निखरे, मांगू रब मैं ।
रेखा चिंता की, सबकी हरूँ ।
ये गीत मेरे, दीपक से बरे ॥2॥
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।
ममता से भरे, मेरे गीत सरल ।
वर्षा हो सुधा की, न कोई गरल ।
करूँ वंदना मैं, मेरे गीत सभी ।
हो रेणु-रजत, सुरभि बिखरे ॥3॥
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।
मेरे गीत बने, सुंदर नागर ।
छलके ना फूहड़ता गागर ।
शालीन हों ये, लवलीन बनें ।
मेरी गीत लता, में श्वेता फरे ॥4॥
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।
मेरे छंद नवीन, ग़ज़ल पारस ।
सरिता के किनारे, ज्यों सारस ।
करूँ साधना यूँ, गरिमा पाऊँ ।
मैं प्रवीण बनूँ,तू मुझे जो वरे ॥5॥
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।
हों गीत मेरे, संगीत भरे ।
लय ना लय हो, सरगम मुखरे ।
रचना स्वरचित एवं मौलिक है
©®🙏
-अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू'✍
छिंदवाड़ा मप्र
अतुलनीय स्वर
ReplyDeleteजी हार्दिक आभार
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