अब की जो नया साल हो,
उसमें सभी खुशहाल हो ।
जो आज तलक ना हुआ कभी,
हे प्रभु! वही कमाल हो ॥
विद्या पाए नन्ही पीढ़ी,
बचपन करे ना बाल श्रम ।
वृद्धों को ना जाना पड़े,
जीवन संध्या में वृद्धाश्रम ।
हर यौवन पाए रोजगार,
सम्मान से ऊंचा भाल हो ॥
अब की जो नया साल हो,
उसमें सभी खुशहाल हो ।
ये देश हमारा रोज चले,
अपनी संस्कृति फैलाने को ।
फिर भागीरथी कोई जागे,
समता गंगा ले आने को ।
भा रत हो भारतवासी अब,
संस्कार के कमल विशाल हो ॥
अब की जो नया साल हो,
उसमें सभी खुशहाल हो ।
हर और एकता पुष्प खिलें,
भारत बगिया हो धवल नवल ।
दुर्भाग्य देश का सो जाए,
नेतृत्व मिले इसे प्रबल कुशल ।
संतुलित कहें मितभाषी हो,
नेता ना अब वाचाल हो ॥
अब की जो नया साल हो,
उसमें सभी खुशहाल हो ।
नित ज्ञान प्रकाश प्रवाहित कर,
सब तिमिर हृदय का दूर करें ।
मां शारदे! वर दे, छंद मेरे,
रोशन जग को भरपूर करें ।
हर शब्द काव्य रंगोली हो,
और अर्थ अबीर गुलाल हो ॥
अब की जो नया साल हो,
उसमें सभी खुशहाल हो ।
मेरे शब्दों की अर्थ बूंद,
साहित्य सरिता हो जाए ।
भावों के मोती पाकर के,
साहित्य का सागर लहराए ।
इस नवल वर्ष की नई सुबह,
तन्हा ना कोई झाल हो ॥
जो आज तलक ना हुआ कभी,
हे प्रभु ! वही कमाल हो ।
अब की जो नया साल हो,
उसमें सभी खुशहाल हो ।
जो आज तलक ना हुआ कभी,
हे प्रभु! वही कमाल हो ॥
रचना स्वरचित एवं मौलिक है ।
©®🙏
-सुश्री अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू'✍
छिंदवाड़ा मप्र•
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शब्दकोष
झाल = लहर
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