रिश्तो के मोती
-अंजुमन आरज़ू©✍
पाक रिश्तो के एहसास के नेह से,
भावनाओं के मोती निखर जाएंगे ।
प्यार की डोर से जब ये मोती बंधें,
बन के माला अनोखी संवर जाएंगे ।
मोतियों की लड़ी सा ये परिवार है,
डोर सा कायदा जिसका आधार है ।
छेद रूपी समर्पण जरूरी यहां,
वरना रिश्तो के मोती बिखर जाएंगे ।
देख मौसम सुहाना ऋतुराज सा,
जिंदगी का ये पतझर है नाराज सा ।
छेड़ कर मन की वीणा के सुर ताल को,
गुनगुनाते रहेंगे जिधर जाएंगे ।
स्वप्न देखा जो हमने वो साकार है,
मोती माला ये स्वागत को तैयार है ।
आज तो बस सफलता की घाटी चढ़ी,
देख लेना अभी हम शिखर जाएंगे ।
23/04/2019
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