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संबंधों का ताना-बाना

हर सास का माँ सा हो दामन,
खुशियों से भर दे जो जीवन ।
पर ऐसा कब हो पाता है,
ना जाने कैसा नाता है ।
दोनों में रहती है अनबन,
जैसे हों ये कोई दुश्मन ॥

जहाँ स्त्री पूजी जाती हैं,
वहाँ बहुऐं क्यों जल जातीं हैं ।
वृद्धाश्रम भी क्यों जरूरी हैं,
कुछ सासों की भी मजबूरी हैं ।
दोनों की समस्याएँ भारी,
कब तक रहे गृहयुद्ध जारी ।
कब होगा जागृत सबका मन ॥
दोनों में रहती है अनबन ।........

हर बहू की मीठी हो बोली,
हर बोल में मिश्री हो घोली ।
जब सासू 'माँ' बन जाऐगी,
बहू भी बहू न रह पाएगी ।
तब रिश्तों का होगा संगम,
खुशियँ बिखरेंगी मद्धम मद्धम ।
घर हो जाएगा चंदन वन।।
खुशियों से भर दे जो दामन ।

हर सास का माँ सा हो दामन,
खुशियों से भर दे जो दामन ॥

रचना तिथि- 23-3-2018
रचना स्वरचित एवं मौलिक है ।
©®🙏
काॅपीराइट सुरक्षित है ।🙏
- सुश्री अंजुमन मंसूरी आरज़ू✍
छिंदवाड़ा मप्र

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