माँ का सारा जीवन इक साधना है ।
तुझ को समर्पित मेरी हर आराधना है ॥
कितनी बार ये सोचा होगा मर जाती हूँ ।
जीवन दुख का सागर है, मैं टर जाती हूँ ।
पर मेरे मुख को देख सही हर यातना है ॥1॥
तुझ को समर्पित मेरी हर आराधना है ।
सजदे में रहती है जब संकट आते हैं ।
तेरी दुआओं से हर दुख कट जाते हैं ।
मेरे लिए ही उसकी हर एक प्रार्थना है ॥2॥
तुझको समर्पित मेरी हर आराधना है ।
मेरे जीवन के सुख से तू मुस्काती है ।
उन्नत मैं होऊॅ तो तू सुख पाती है ।
करती प्रभु से मेरे हित की याचना है ॥3॥
तुझको समर्पित मेरी हर आराधना है ।
मेरी दृष्टि बन कर मुझ को राह दिखाती ।
आशावान रहो हर दम तुम ये समझाती ।
चलो संभल कर गिरने पर भी मात ना है ॥4॥
तुझको समर्पित मेरी हर आराधना है ।
मेरे लिए तूने जो भी सपने सजाए ।
अपने त्याग परिश्रम से साकार बनाएं ।
जीवन सूत साहस से अब कातना है ॥5॥
माँ का सारा जीवन इक साधना है ।
तुझ को समर्पित मेरी हर आराधना है ॥
रचना तिथि 26 3 2018
स्वरचित एवं मौलिक रचना
©🙏
-अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू'✍
छिंदवाड़ा मप्र
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