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Showing posts from 2019

ज़रूरी है

वज़्न -1222 1222 1222 1222             #ग़ज़ल सहर से शाम तक सूरज सा चलना भी जरूरी है, निकलना भी ज़रूरी है कि ढलना भी ज़रूरी है । सितारे शम'अ जुगनू चाँद ने मिल रात रोशन की, हुकूमत शम्स की कुछ दिन बदलन...

तन्हा मिला

वज़न-2122  2122  2122   212             # ग़ज़ल गौर से देखा तो ये सारा जहां तन्हा मिला, चांद तन्हा रात तन्हा आसमां तन्हा मिला । वो जो महफ़िल में लगाता फिर रहा था कहकहे, राज़ ए ग़म उसके भी दिल मे...

चनाबों में नहीं

वज़्न - 2122 2122  212            #ग़ज़ल जो हैं दानां* वो सराबों में नहीं, ज़िंदगी उनकी रूआबों में नहीं । जो पसीने में बसी ख़ुद्दार के, वैसी ख़ुशबू सौ गुलाबों में नहीं । जो सुकूं माँ बाप की ख...

ग़ज़ल ज़िंदगी

वज़्न  -122  122  122  122              #ग़ज़ल फिसलती मिलेगी संभलती मिलेगी, यहां ज़िंदगी रँग बदलती मिलेगी । कभी कुछ न हो पास फिर भी खुशी से, सुकूं के फ़लक पे टहलती मिलेगी । अजब ज़िंदगी का फ़...

ग़ज़ल - दुनिया

वज़्न -122  122  122  122              ग़ज़ल अनोखी ये दुनिया बदलती मिलेगी, भरम में ये ख़ुद को ही छलती मिलेगी । जिन्होंने सिखाया है चलना संभल कर, उन्हीं से बदल चाल चलती मिलेगी । अगर वक्त पर...

मुबारक़ तुम्हे जन्मदिन हो तुम्हारा

वज़न-122 122 122 122 तुम्हें आज रब ने ज़मीं पे उतारा । मुबारक़ तुम्हें जन्मदिन हो तुम्हारा ॥ दुआ है कि राहों में कांटा न आए । ये जीवन सदा फूल सा मुस्कुराए । अगर फिर भी आये रुकावट के पत्थर ...

शामियां की तरह

वज़न -212  212  212             ग़ज़ल सर पे है शामियां की तरह । ये दुआ आसमां की तरह ॥ इस ज़माने में मां के सिवा । कोई होगा न मां की तरह ॥ मुझको उसने लगाया गले । चूम कर बागबां की तरह ॥ उनको स...

चाणक्य छला जाता है

आधार छंद - सार/ललित छंद गीत - चाणक्य छला जाता है जलता है खुद दीपक सा पर, ज्ञान प्रकाश दिखाता । बांट के अपना सब सुख जन में, आनंदित हो जाता । इसके बदले शिक्षक जग से, देखो क्या पाता है ...

ग़ज़ल - फ़लसफ़ा

2122 2122 2122 212                  ग़ज़ल इन किताबों में निहां है ज़िंदगी का फ़लसफ़ा । ये खमोशी से बयां करतीं सदी का फ़लसफ़ा ॥ बनके ज़ीना हर बशर को जीना सिखलाती किताब । इनमें बातिन है बुलंद...

प्यार कौन करे

वज़न-2122 1212 22/112 ग़ज़ल ज़िंदगी फिर से ख़ार कौन करे । प्यार अब बार बार कौन करे ॥ प्यार मीरा सी इक इबादत है । प्यार को दागदार कौन करे ॥ जिसके किरदार में न खुशबू हो । ऐसी सूरत से प्यार कौन क...

सूरज से बग़ावत

वज़्न    -   221 1222 221 1222 अर्कान -  मफ़ऊल मुफ़ाईलुन मफ़ऊल मुफ़ाईलुन बह्र - बह्रे हज़ज मुसम्मन अख़रब _________________                ग़ज़ल सूरज को डुबोने को करता ये इबादत है । है चांद जिस से रोशन उसस...

न अब जगमग आना हुआ

ग़ज़ल दूर परदेस में आब ओ दाना हुआ । आज बेटा भी घर से रवाना हुआ ॥ भूलकर फ़र्ज़ जब हक़ की चाहत बड़ी । रेज़ा रेज़ा हर इक आशियाना हुआ ॥ रच के साजिश किए तर्क़ रिश्ते सभी । मेरी बातों ...

शम्'अ रोशन कर दी हमने

वज़न- 2122 2122 2122 212 ग़ज़ल शम्'अ रोशन कर दी हमने तीरगी के सामने । टिक ना पाएगा अंधेरा रोशनी के सामने ॥ बिन थके चलते रहे गर मंजिलों की चाह में । हार जाती मुश्किलें भी आदमी के सामने ॥ पर्वत...

हल्दी

लघुकथा        एक बहन एक भाई वाले एक आदर्श परिवार में बड़े अरमानों से भाई का विवाह हुआ । गोरी सुंदर दुल्हन घर आई,  नये रिश्ते बने, माता-पिता को बहू, बहन को भाभी मिली । और भी नए रिश...

बिगड़ गई बात

बिगड़ गई बात बातों ही बातों में देखो बिगड़ गई बात । टूटे रिश्ते पल में छूटा जीवन भर का साथ ॥ कुछ तुमने हमसे कहा, कुछ हमने तुम से कहा । मानी ना अपनी खता, एक दूसरे से यूँ कहा । तुमने ...

लिखी ईश को पाती

पुनर्जन्म लेने वाली तो, बात ना हम को भाती है। पर यदि इस में सच्चाई तो, मेरी कलम ये गाती है। सात जन्म के बंधन वाला तो, नहीं मेरा कोई साथी है। मुझको ये ही माँ-पा देना, लिखी ईश को पाती ...

हाइकु

     पत्नी ये बोली सुन ओ हमजोली     होके नरम ।      दोस्तों की टोली करती है ठिठोली      खुली है रम|      बीड़ी शराब होते सब खराब     फैंको चिलम|     होता है बुरा सिगरेट का कश     न...

दो जून की रोटी

दो जून की रोटी मिलती, हम हैं किस्मत वाले । कितने लोग भूखे रहते हैं, मिलते नहीं निवाले ॥ हाथ ठेला लिए धूप में, आम-जाम चिल्लाए । तब जाकर घर वालों को वो, आधा पेट खिलाए । रोटी की खातिर ...

नवजीवन

यूं ही गुमसुम सी बैठी थी । सोच रही थी क्या जीना है । बिटिया आंचल धाम के बोली । मम्मी मुझको मम पीना है ॥1॥ खुद को छोड़ कहीं खो जाऊं । चिर निद्रा में मैं सो जाऊं । पर क्या होगा फिर इ...

जुनून

नामुमकिन को मुमकिन कर दे ऐसा जज़्बा जुनून है । कोशिश करने वालों के तो सारे रंग मरून हैं ।। अपनी अपनी ज़िद पे अड़े हैं सीमा के दोनों ही छोर । वो भी अपनी माँ के बेटे हम भी तो हे सिर...

हिम्मत को सलाम

भीगे परों से उड़ के तूने छू लिया आसमान । हिम्मत को सलाम है तेरा हौसला है महान ।। कोई नहीं सूरज का साथी तन्हा तमतमाता है । पर्वत के शिखरों पे चढ़ पाताल का तम भगाता है ।। जग का अके...

पापा से बेहद प्यार है

माना कि यह जीवन, संकुचन नहीं विस्तार है । किन्तु मुझको अपने पापा से बेहद प्यार है ॥ गोदावरी ने विस्तार रोका, ऋषि अगस्त के कमंडल में । मेरा भी विस्तार रुक रहा, परिस्थितियों के ...