वज़न-122 122 122 122
तुम्हें आज रब ने ज़मीं पे उतारा ।
मुबारक़ तुम्हें जन्मदिन हो तुम्हारा ॥
दुआ है कि राहों में कांटा न आए ।
ये जीवन सदा फूल सा मुस्कुराए ।
अगर फिर भी आये रुकावट के पत्थर ।
उन्हीं से बना पुल करो राह बहतर ।
बनो हर चुनौती का उत्तर करारा ॥
मुबारक़ तुम्हें जन्मदिन हो तुम्हारा ॥
रहो छांव में पर चखो धूप को भी ।
निखारो तो संघर्ष से रूप को भी ॥
करो काम ऐसे कि हो नाम रोशन ।
महकने लगे तुमसे सारा ही गुलशन ॥
बनो फूल दीपक कली या सितारा ।
मुबारक तुम्हें जन्मदिन हो तुम्हारा ॥
अंधेरा निराशा का छाए न काला ।
रहे हौसलों का सदा ही उजाला ॥
ख़ुदा तुम को हर हाल में दे सहारे ।
न पतवार छूटे करों से तुम्हारे ॥
भंवर में फंसे ना तुम्हारा शिकारा ।
मुबारक़ तुम्हें जन्मदिन हो तुम्हारा ॥
तुम्हारे लिए हमने मांगी है मन्नत ।
मिले इस ज़मीं पे ही खुशियों की जन्नत
॥
न हो कामयाबी से कोई भी दूरी ।
सभी 'आरज़ू' दिल की हो जाएँ पूरी ॥
रहे ख़ुशनुमा ज़िंदगी भर नज़ारा ।
मुबारक़ तुम्हें जन्मदिन हो तुम्हारा॥
तुम्हें आज रब ने ज़मीं पे उतारा ।
मुबारक़ तुम्हें जन्मदिन हो तुम्हारा ॥
-अंजुमन 'आरज़ू'©✍
09/07/2019
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