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तन्हा मिला

वज़न-2122  2122  2122   212

            # ग़ज़ल

गौर से देखा तो ये सारा जहां तन्हा मिला,
चांद तन्हा रात तन्हा आसमां तन्हा मिला ।

वो जो महफ़िल में लगाता फिर रहा था कहकहे,
राज़ ए ग़म उसके भी दिल में हां निहां तन्हा मिला ।

चश्मदीदां थे बहुत उस हादसे में भीड़ थी,
खौफ के मारे मगर बस इक बयां तन्हा मिला ।

अपनी तामीर ए ख़ुदी में हर बशर मशरूफ़ है,
साथ कितने फ़र्द हैं पर आशियां तन्हा मिला ।

साथ पर्वत कब चले हैं राह में ये सोच कर,
हां सदफ़ की चाह में दरिया रवां तन्हा मिला ।

दूर तन्हाई करे ऐसा जहां में कौन है,
जो मिला हो ख़ुद से ही फ़िर वो कहां तन्हा मिला ।

'आरज़ू' ने भी सजा ली रश्क़ से तनहाइयां,
ओस का मोती चमकता जब यहां तन्हा मिला ।

    -अंजुमन आरज़ू ©✍
01/10/2019

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