Skip to main content

प्यार कौन करे

वज़न-2122 1212 22/112
ग़ज़ल

ज़िंदगी फिर से ख़ार कौन करे ।
प्यार अब बार बार कौन करे ॥

प्यार मीरा सी इक इबादत है ।
प्यार को दागदार कौन करे ॥

जिसके किरदार में न खुशबू हो ।
ऐसी सूरत से प्यार कौन करे ॥

प्यार है इक सदा खमोशी की ।
प्यार को इस्तहार कौन करे ॥

प्यार की राह पुर ख़तर है मगर ।
प्यार में होशियार कौन करे ॥

कितने दरिया बहा दिए रो के ।
आँख अब अश्क़ बार कौन करे ॥

राह देखी है उसकी सदियों तक ।
और अब इंतजार कौन करे ॥

जिसकी रग़ रग़ में हो फरेब भरा ।
उस पे अब एतबार कौन करे ॥

मुझको कहता है वो महादेवी ।
उन सी कविता हज़ार कौन करे ॥

गर नहीं है खुशी जमाने में ।
ग़म की दहलीज़ पार कौन करे ॥

'आरज़ू' खुश्क हो गयी दिल की ।
अब ख़िज़ा को बहार कौन करे ॥

   -अंजुमन आरज़ू ©✍
20/08/2019

Comments

Popular posts from this blog

सरस्वती वंदना

हों गीत मेरे, संगीत भरे । लय ना लय हो, सरगम मुखरे । माँ शारदा विनती करूँ तुझ से । हों ये गीत अनूप, अटल-ध्रुव से । मेरे गीतों को आशीष दे माँ । ये मोहन हों, मुरली को धरे ॥1॥ लय ना लय हो स...

'इंद्रधनुष' (दोहा गीत)

इंद्रधनुष छाये गगन,खिले धरा का रूप । कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्रारुप ॥ इंद्रधनुष सा नेह तो, सतरंगी संसार । रंग मिलें मिलकर सजें, पायें रूप अनूप ॥ कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्र...

हम्द-02 रब के बंदों से की महब्बत है

रब    के   बंदों  से   की  महब्बत  है अपनी  तो    बस   यही   इबादत  है सारी   तारीफ़   है   ख़ुदा   के   लिए जिसकी  दोनों  जहाँ  में  अज़मत है फूल     पत्तों    में    बेल    बूटों   में देखिए   रब   की   ही    इबारत   है शुक्र है  रब का  जो दिया  सो दिया अपनी क़िस्मत से कब शिकायत है ये   नमाज़ें    ज़कात    हज    रोज़े रब  को   पाने  की  ही   रवायत  है ग़म  में  भी   ढूंढ  ली   ख़ुशी   मैंने ये   हुनर   उसकी  ही   इनायत  है लाख    बेचैनियाँ    सही    लेकिन उसके   एहसास  से  ही   राहत है जिसके...