वज़्न -1222 1222 1222 1222 #ग़ज़ल सहर से शाम तक सूरज सा चलना भी जरूरी है, निकलना भी ज़रूरी है कि ढलना भी ज़रूरी है । सितारे शम'अ जुगनू चाँद ने मिल रात रोशन की, हुकूमत शम्स की कुछ दिन बदलन...
वज़न-2122 2122 2122 212 # ग़ज़ल गौर से देखा तो ये सारा जहां तन्हा मिला, चांद तन्हा रात तन्हा आसमां तन्हा मिला । वो जो महफ़िल में लगाता फिर रहा था कहकहे, राज़ ए ग़म उसके भी दिल मे...
वज़्न - 2122 2122 212 #ग़ज़ल जो हैं दानां* वो सराबों में नहीं, ज़िंदगी उनकी रूआबों में नहीं । जो पसीने में बसी ख़ुद्दार के, वैसी ख़ुशबू सौ गुलाबों में नहीं । जो सुकूं माँ बाप की ख...
वज़्न -122 122 122 122 #ग़ज़ल फिसलती मिलेगी संभलती मिलेगी, यहां ज़िंदगी रँग बदलती मिलेगी । कभी कुछ न हो पास फिर भी खुशी से, सुकूं के फ़लक पे टहलती मिलेगी । अजब ज़िंदगी का फ़...
वज़्न -122 122 122 122 ग़ज़ल अनोखी ये दुनिया बदलती मिलेगी, भरम में ये ख़ुद को ही छलती मिलेगी । जिन्होंने सिखाया है चलना संभल कर, उन्हीं से बदल चाल चलती मिलेगी । अगर वक्त पर...
वज़न-122 122 122 122 तुम्हें आज रब ने ज़मीं पे उतारा । मुबारक़ तुम्हें जन्मदिन हो तुम्हारा ॥ दुआ है कि राहों में कांटा न आए । ये जीवन सदा फूल सा मुस्कुराए । अगर फिर भी आये रुकावट के पत्थर ...
वज़न -212 212 212 ग़ज़ल सर पे है शामियां की तरह । ये दुआ आसमां की तरह ॥ इस ज़माने में मां के सिवा । कोई होगा न मां की तरह ॥ मुझको उसने लगाया गले । चूम कर बागबां की तरह ॥ उनको स...