वज़न-2122 1212 22/112 ग़ज़ल ज़िंदगी फिर से ख़ार कौन करे । प्यार अब बार बार कौन करे ॥ प्यार मीरा सी इक इबादत है । प्यार को दागदार कौन करे ॥ जिसके किरदार में न खुशबू हो । ऐसी सूरत से प्यार कौन क...
वज़्न - 221 1222 221 1222 अर्कान - मफ़ऊल मुफ़ाईलुन मफ़ऊल मुफ़ाईलुन बह्र - बह्रे हज़ज मुसम्मन अख़रब _________________ ग़ज़ल सूरज को डुबोने को करता ये इबादत है । है चांद जिस से रोशन उसस...
ग़ज़ल दूर परदेस में आब ओ दाना हुआ । आज बेटा भी घर से रवाना हुआ ॥ भूलकर फ़र्ज़ जब हक़ की चाहत बड़ी । रेज़ा रेज़ा हर इक आशियाना हुआ ॥ रच के साजिश किए तर्क़ रिश्ते सभी । मेरी बातों ...
वज़न- 2122 2122 2122 212 ग़ज़ल शम्'अ रोशन कर दी हमने तीरगी के सामने । टिक ना पाएगा अंधेरा रोशनी के सामने ॥ बिन थके चलते रहे गर मंजिलों की चाह में । हार जाती मुश्किलें भी आदमी के सामने ॥ पर्वत...
लघुकथा एक बहन एक भाई वाले एक आदर्श परिवार में बड़े अरमानों से भाई का विवाह हुआ । गोरी सुंदर दुल्हन घर आई, नये रिश्ते बने, माता-पिता को बहू, बहन को भाभी मिली । और भी नए रिश...
बिगड़ गई बात बातों ही बातों में देखो बिगड़ गई बात । टूटे रिश्ते पल में छूटा जीवन भर का साथ ॥ कुछ तुमने हमसे कहा, कुछ हमने तुम से कहा । मानी ना अपनी खता, एक दूसरे से यूँ कहा । तुमने ...
पुनर्जन्म लेने वाली तो, बात ना हम को भाती है। पर यदि इस में सच्चाई तो, मेरी कलम ये गाती है। सात जन्म के बंधन वाला तो, नहीं मेरा कोई साथी है। मुझको ये ही माँ-पा देना, लिखी ईश को पाती ...