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फूलों संग शूलें

कौन है दुनिया में ऐसा जो बस झूलों में झूले । सहना पड़ता है सबको ही फूलों के संग शूले ।। फूल का रूप खिलाने को ज्यों धूप ज़रूरी है । जीवन में भी बिन संघर्ष हर बात अधूरी है । मुस्क...

जीवन का गीत

जीवन का गीत सुनातीं हैं समन्दर की लहरें । धीरज से गुनगुनाओ ये ग़ज़ल की दो बहरें ।। अपने खारे पन की पीड़ा कह नहीं पाता । दूर तक फैला है लेकिन बह नहीं पाता । इतना बड़ा होकर भी कह...

तुमसे ना कोई नाता है

तुमसे न कोई नाता है, पर साथ तुम्हारा भाता है । तुमसे बिछड़न की बात सोच, मन कुछ उदास हो जाता है । जब आये थे तुम कोई न थे, पर धीरे धीरे मीत बने। फिर अर्थपूर्ण कुछ शब्द घने, संबंधों के ...

नारी की परिभाषा

क्या बांधेगी नारी तुझको  कोई एक परिभाषा । सहन शक्ति तू,सृजन शक्ति तू,तू आशा की भाषा ॥ स्नेहमयी ममता की मूरत, प्रेम की छाया ठंडी । पतन पाप पाखंड जले जब,बन जाती रंणचण्डी। अबला न...

अब सांझ ढली

अब साँझ ढली घर चल साथी, पूजन वंदन दीया बाती । कल भी तो बिटिया बोली थी, माँ याद तुम्हारी है आती ॥ प्रतिस्पर्धा कैसी छाई है, दोनों को करनी कमाई है । तब होते हैं सपने साकार, तब घर ले...

गरीबी-गौरव गान

गरीबी  तो गौरव गान है । इसका बहुत सम्मान है । शबरी सा धीरज धर  के, कुछ तप भी करना पड़ता है । आस प्रभु की मन भरके, जग से लड़ना पड़ता है । तब बेर खाते श्री राम है ।। इसका बहुत सम्मान ह...

धरती की संतान

हम वसुधा के रहने वाले  धरती की सन्तान हैं । पर शायद हम ने खो दी अपनी सुखद पहचान है ॥ नदियों की लहरों में जागा गीत नया संगीत नया । पर्वत सागर करते हैं संघर्ष के लाखों गीत बयां ॥ ...