वज़्न -1222 1222 1222 1222 ग़ज़ल कहानी वेदना की अब यहाँ किसको सुनाना है । हमारा ही खजाना है हमे ही अब निभाना है ॥ महादेवी की तनुजा मैं दुखों की हूँ वही बदली । गगन में भी नयन में भ...
इंद्रधनुष छाये गगन,खिले धरा का रूप । कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्रारुप ॥ इंद्रधनुष सा नेह तो, सतरंगी संसार । रंग मिलें मिलकर सजें, पायें रूप अनूप ॥ कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्र...
संरक्षित कर लो जल बरना जग जाएगा जल । आज सजग हो जाओ नहीं तो पछताओगे कल ॥ झीलों की आंखों में आंसू घोर उदासी है । अल्लह्ड़ता छोड़ी नदियों ने और रुआंसी है । सूखे होंठ कुओं के भी तो औ...
ये जीवन एक कविता सा या कविता है ये जीवन सी । कभी तो मुक्त बहती है कभी छंदों के बंधन सी । मुझे जीवन की कविता का सदा हर रूप भाता है । कभी ग़म की चुभन गाती कभी खुशियों के गायन सी ॥ उड...
हरी भरी हो ज़िंदगी, मांगू हरि से आज । इंद्रधनुष के रंग हों, बजे खुशी के साज ॥1॥ बाल सखा संग फाग में, लाल हुआ है लाल । देख जसोदा चूमती, है कान्हा का भाल ॥2॥ देखो बैठे साजना, छुपकर पीप...
चलो दिलों में प्यार जगायें होली में । नफरत की दीवार गिरायें होली में ॥ बरसो से भीगी लकड़ी सा सुलगे मन । स्वार्थ ईर्ष्या द्वेष भरा सारा जीवन ॥ रीत नयी इस बार चलाई जाएगी । ऐसी ...
1- ईर्ष्या कालकूटी है ईर्ष्या, करें हृदय जो वास । औरों से पहले सुनो, निज का होता नास ॥ अग्नि सी है ये ईर्ष्या, पल पल जलती जाय । जीवन के सब धन जले, हाथ न कुछ भी आय ॥ 2- द्वेष गरल पिये जग ह...