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Showing posts from March, 2019

महादेवी जी की जयंती पर

वज़्न -1222 1222 1222 1222                ग़ज़ल कहानी वेदना की अब यहाँ किसको सुनाना है । हमारा ही खजाना है हमे ही अब निभाना है ॥ महादेवी की तनुजा मैं दुखों की हूँ वही बदली । गगन में भी नयन में भ...

'इंद्रधनुष' (दोहा गीत)

इंद्रधनुष छाये गगन,खिले धरा का रूप । कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्रारुप ॥ इंद्रधनुष सा नेह तो, सतरंगी संसार । रंग मिलें मिलकर सजें, पायें रूप अनूप ॥ कुछ ऐसा ही है सखी, जीवन का प्र...

जल संरक्षण

संरक्षित कर लो जल बरना जग जाएगा जल । आज सजग हो जाओ नहीं तो पछताओगे कल ॥ झीलों की आंखों में आंसू घोर उदासी है । अल्लह्ड़ता छोड़ी नदियों ने और रुआंसी है । सूखे होंठ कुओं के भी तो औ...

'कविता' पर कविता

ये जीवन एक कविता सा या कविता है ये जीवन सी । कभी तो मुक्त बहती है कभी छंदों के बंधन सी । मुझे जीवन की कविता का सदा हर रूप भाता है । कभी ग़म की चुभन गाती कभी खुशियों के गायन सी ॥ उड...

यमक के दोहे

हरी भरी हो ज़िंदगी, मांगू हरि से आज । इंद्रधनुष के रंग हों, बजे खुशी के साज ॥1॥ बाल सखा संग फाग में, लाल हुआ है लाल । देख जसोदा चूमती, है कान्हा का भाल ॥2॥ देखो बैठे साजना, छुपकर पीप...

"प्यार जगायें होली में"

चलो दिलों में प्यार जगायें होली में । नफरत की दीवार गिरायें होली में ॥ बरसो से भीगी लकड़ी सा सुलगे मन । स्वार्थ ईर्ष्या द्वेष भरा सारा जीवन ॥ रीत नयी इस बार चलाई जाएगी । ऐसी ...

कुछ दोहे

1- ईर्ष्या कालकूटी है ईर्ष्या, करें हृदय जो वास । औरों से पहले सुनो, निज का होता नास ॥ अग्नि सी है ये ईर्ष्या, पल पल जलती जाय । जीवन के सब धन जले, हाथ न कुछ भी आय ॥ 2- द्वेष गरल पिये जग ह...

कुछ दोहे

1- ईर्ष्या कालकूटी है ईर्ष्या, करें हृदय जो वास । औरों से पहले सुनो, निज का होता नास ॥ अग्नि सी है ये ईर्ष्या, पल पल जलती जाय । जीवन के सब धन जले, हाथ न कुछ भी आय ॥ 2- द्वेष गरल पिये जग ह...

ग़ज़ल (सजाना सीखिए)

वज़्न   -   2122  2122 212 अर्कान -  फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन बह्र     -  बह्रे रमल मुसद्दस मख़्बून महज़ूफ़ क़ाफ़िया - आना स्वर की बंदिश रदीफ़ - सीखिये            ग़ज़ल अपनी तन्हाई सजाना सीख...

ग़ज़ल

वज़न 1222 1222 1222 1222                ग़ज़ल खुदी को जो न पहचाने वही कस्तूर मांगा था । हमारे रहबररों ने क्या यही जम्हूर मांगा था ॥ सियासी साजिशें करके शराबी हम को ठहराया । हमें मालूम ही कब ...

सरस्वती वंदना

हों गीत मेरे, संगीत भरे । लय ना लय हो, सरगम मुखरे । माँ शारदा विनती करूँ तुझ से । हों ये गीत अनूप, अटल-ध्रुव से । मेरे गीतों को आशीष दे माँ । ये मोहन हों, मुरली को धरे ॥1॥ लय ना लय हो स...