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रौशनी के हमसफ़र

रौशनी के हमसफ़र ग़ज़ल-संग्रह अंजुमन ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा म प्र               प्रकाशक       युगधारा फाउंडेशन एवं प्रकाशन            लखनऊ, उत्तरप्रदेश                               --×-- युगधारा फाउंडेशन एवं प्रकाशन कार्यालय - बशीरतगंज, लखनऊ उत्तर प्रदेश 226004 संपर्क ... अणुडाक... प्रथम संस्करण    : 2021 © अंजुमन मंसूरी 'आरज़ू' जाम मार्ग उमरानाला, जिला छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश, भारत पिन - 480107 मो• न•- 9098 902567              9424 902567 ISBN - 978-81-948214-8-5 मूल्य         : ₹200/- वैधानिक चेतावनी - वैधानिक चेतावनी - मेरी अनुमति के बिना मेरे गीत, ग़ज़ल, कहानी आदि किसी भी रचन...

मैं औरत हूँ

वज़्न - 1222 1222 1222 1222                ग़ज़ल नज़ाकत हूँ तमाज़त हूँ इबादत हूँ मैं औरत हूँ, मुसन्निफ़ रब है जिसका वो इबारत हूँ मैं औरत हूँ । हक़ीक़त हूँ अक़ीदत हूँ मसर्रत हूँ मैं औरत हूँ, मुझे है नाज़  ख़ुद पर मैं वजाहत हूँ मैं औरत हूँ । मिले सौगात में नफ़रत का सहरा चाहे रिश्तों से, रवाँ कौसर सा दरिया-ए-मुहब्बत हूँ मैं औरत हूँ । बड़े कमज़र्फ़ हैं वो जो कहें दोजख़ का दर मुझको,  समझना मत मुझे कमतर मैं जन्नत हूँ मैं औरत हूँ । बिना मेरे ये दुनिया दो क़दम भी बढ़ नहीं सकती, मैं माज़ी, हाल मुस्तकबिल की रग़बत हूँ मैं औरत हूँ । लगाओ तोहमतें  इस कद्र मत इस्मत पे ए लोगो, हूँ माँ ईशा की मरियम सी नफ़ासत हूँ मैं औरत हूँ । हवा वो दिन हुए जब मैं फ़क़त महदूद थी घर तक, ज़मीं अंबर समंदर की मैं वुस'अत हूँ मैं औरत हूँ । किया सजदा हिमालय ने मेरी हिम्मत को झुक झुक के, वतन की सरहदों की मैं हिफाज़त हूँ मैं औरत हूँ । मुअत्तर है मेरा किरदार ये रब की इनायत है, करें गुल 'आरज़ू' जिसकी वो निकहत हूँ मैं औरत हूँ ।    -अंजुमन 'आरज़ू' ©®✍ 08/03/2020 छिंदवाड़...

ज़रूरी है

वज़्न -1222 1222 1222 1222             #ग़ज़ल सहर से शाम तक सूरज सा चलना भी जरूरी है, निकलना भी ज़रूरी है कि ढलना भी ज़रूरी है । सितारे शम'अ जुगनू चाँद ने मिल रात रोशन की, हुकूमत शम्स की कुछ दिन बदलन...

तन्हा मिला

वज़न-2122  2122  2122   212             # ग़ज़ल गौर से देखा तो ये सारा जहां तन्हा मिला, चांद तन्हा रात तन्हा आसमां तन्हा मिला । वो जो महफ़िल में लगाता फिर रहा था कहकहे, राज़ ए ग़म उसके भी दिल मे...

चनाबों में नहीं

वज़्न - 2122 2122  212            #ग़ज़ल जो हैं दानां* वो सराबों में नहीं, ज़िंदगी उनकी रूआबों में नहीं । जो पसीने में बसी ख़ुद्दार के, वैसी ख़ुशबू सौ गुलाबों में नहीं । जो सुकूं माँ बाप की ख...

ग़ज़ल ज़िंदगी

वज़्न  -122  122  122  122              #ग़ज़ल फिसलती मिलेगी संभलती मिलेगी, यहां ज़िंदगी रँग बदलती मिलेगी । कभी कुछ न हो पास फिर भी खुशी से, सुकूं के फ़लक पे टहलती मिलेगी । अजब ज़िंदगी का फ़...

ग़ज़ल - दुनिया

वज़्न -122  122  122  122              ग़ज़ल अनोखी ये दुनिया बदलती मिलेगी, भरम में ये ख़ुद को ही छलती मिलेगी । जिन्होंने सिखाया है चलना संभल कर, उन्हीं से बदल चाल चलती मिलेगी । अगर वक्त पर...