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Showing posts from September, 2019

ग़ज़ल ज़िंदगी

वज़्न  -122  122  122  122              #ग़ज़ल फिसलती मिलेगी संभलती मिलेगी, यहां ज़िंदगी रँग बदलती मिलेगी । कभी कुछ न हो पास फिर भी खुशी से, सुकूं के फ़लक पे टहलती मिलेगी । अजब ज़िंदगी का फ़...

ग़ज़ल - दुनिया

वज़्न -122  122  122  122              ग़ज़ल अनोखी ये दुनिया बदलती मिलेगी, भरम में ये ख़ुद को ही छलती मिलेगी । जिन्होंने सिखाया है चलना संभल कर, उन्हीं से बदल चाल चलती मिलेगी । अगर वक्त पर...

मुबारक़ तुम्हे जन्मदिन हो तुम्हारा

वज़न-122 122 122 122 तुम्हें आज रब ने ज़मीं पे उतारा । मुबारक़ तुम्हें जन्मदिन हो तुम्हारा ॥ दुआ है कि राहों में कांटा न आए । ये जीवन सदा फूल सा मुस्कुराए । अगर फिर भी आये रुकावट के पत्थर ...

शामियां की तरह

वज़न -212  212  212             ग़ज़ल सर पे है शामियां की तरह । ये दुआ आसमां की तरह ॥ इस ज़माने में मां के सिवा । कोई होगा न मां की तरह ॥ मुझको उसने लगाया गले । चूम कर बागबां की तरह ॥ उनको स...

चाणक्य छला जाता है

आधार छंद - सार/ललित छंद गीत - चाणक्य छला जाता है जलता है खुद दीपक सा पर, ज्ञान प्रकाश दिखाता । बांट के अपना सब सुख जन में, आनंदित हो जाता । इसके बदले शिक्षक जग से, देखो क्या पाता है ...

ग़ज़ल - फ़लसफ़ा

2122 2122 2122 212                  ग़ज़ल इन किताबों में निहां है ज़िंदगी का फ़लसफ़ा । ये खमोशी से बयां करतीं सदी का फ़लसफ़ा ॥ बनके ज़ीना हर बशर को जीना सिखलाती किताब । इनमें बातिन है बुलंद...